समाज के लिए भी सोचें

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Dated: March 2025

शासन, प्रशासन, जैन समाचार और जैन समाज के संदर्भ में समय-समय पर कई लोग लेखन करते हैं, जो वास्तव में प्रेरणादायक है। लेकिन दुर्भाग्यवश, आज हमारे समाज की संवेदनशीलता इतनी क्षीण हो गई है कि हम समाज की समस्याओं, अस्तित्व और भविष्य को लेकर चिंतन करना ही भूल गए हैं।

हम धन, समय, श्रम और नए निर्माण में तो व्यस्त हैं, लेकिन ये सब केवल कुछ दिनों की धूमधाम तक सीमित रह गया है। हम तीर्थों, साधु-साध्वियों और समाज की सुरक्षा जैसे गंभीर विषयों पर एकत्र होकर सोचने को तैयार नहीं हैं। यह प्रमाद (अलस्य और लापरवाही) उचित नहीं है।

समाज में जब संकट आता है, तब हम जैन पत्रिकाओं से सहयोग की अपेक्षा करते हैं, लेकिन जब स्वयं आयोजन करते हैं, तब इन पत्रिकाओं को सहयोग देने में पीछे हट जाते हैं। बल्कि स्वतंत्र और निष्पक्ष जैन पत्रिकाओं का शोषण भी कुछ तथाकथित “आगेवान” और “समाज के ठेकेदार” कहे जाने वाले लोग करने लगे हैं। यह स्थिति चिंताजनक है और ऐसे लोगों की संख्या दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही है।


समाधान की आवश्यकता

हमें यह समझना होगा कि समाज केवल आयोजनों और उत्सवों से नहीं चलता। हमें मिलकर समस्याओं का समाधान सोचने की आवश्यकता है। अब समय आ गया है कि हम आत्मचिंतन करें, निष्पक्ष सोच अपनाएं, और समाज के दीर्घकालिक हितों के लिए सकारात्मक कदम उठाएं।

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