13 वर्षीय बालमुनि हंसभद्र मुनि जी बने “शतावधानी”

राजनांदगांव (छत्तीसगढ़)। संस्कारधानी नगरी राजनांदगांव के जैन बगीचा स्थित श्री ज्ञानवल्लभ उपाश्रय में दिनांक 2 नवम्बर 2025 को इतिहास रच दिया गया। गच्छाधिपति गणाधीश प्रवर प.पू. विनय कुशल मुनि जी म.सा. के सुशिष्य प.पू. बालमुनि श्री हंसभद्र मुनि जी द्वारा सकल समाज के समक्ष अत्यंत जटिल और अद्भुत शतावधान प्रयोग को सफलतापूर्वक सम्पन्न किया गया।
इस अवसर पर उपस्थित समाजजनों ने इस विलक्षण प्रयोग का साक्षात्कार किया, जिसमें बालमुनि ने अद्भुत एकाग्रता और स्मरणशक्ति का परिचय देते हुए 100 शब्दों (व्यक्ति, स्थान, वस्तु आदि) को क्रमवार याद रखकर श्रोताओं द्वारा पूछे गए क्रमांक अनुसार सटीक उत्तर दिए।
इस प्रयोग की सफलता पर पूरे समाज ने हर्षोल्लास प्रकट किया और संघ द्वारा प.पू. बालमुनि श्री हंसभद्र मुनि जी को “शतावधानी” की उपाधि प्रदान की गई। अब उन्हें “शतावधानी बालमुनि प.पू. श्री हंसभद्र मुनि जी म.सा.” के नाम से संबोधित किया जाएगा। कार्यक्रम का सीधा प्रसारण YouTube चैनल पर किया गया, जिससे देशभर के जैन समाजजन इस ऐतिहासिक क्षण के साक्षी बने।
यह प्रयोग छत्तीसगढ़ प्रदेश में पहली बार किसी जैन बालमुनि द्वारा सम्पन्न हुआ, जिससे पूरे प्रदेश में गौरव एवं उत्साह का वातावरण छा गया। सकल जैन श्री संघ अध्यक्ष श्री मनोज बैद तथा मीडिया प्रभारी श्री विमल हाजरा ने इस सफलता पर समाज को शुभकामनाएँ प्रेषित कीं।




