“माझे ठाणे” ग्रंथ का भव्य विमोचन, मदन हुंडिया की ऐतिहासिक पहल

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ठाणे में प्रसिद्ध जैनाचार्य यशोवर्म सूरीश्वरजी महाराज की निश्रा में मदन हुंडिया द्वारा लिखित “माझे ठाणे” ग्रंथ का भव्य विमोचन हुआ।

यह ग्रंथ ठाणे शहर के प्राचीन इतिहास से लेकर आधुनिक युग तक की सांस्कृतिक और धार्मिक घटनाओं को समेटे हुए है।

मदनलाल हुंडिया द्वारा छह वर्षों की अथक साधना से तैयार हुआ यह ग्रंथ 200 पृष्ठों में समृद्ध जानकारी प्रस्तुत करता है।

इस ग्रंथ में मराठी, गुजराती और मारवाड़ी संस्कृति के समन्वय को गहराई से दर्शाया गया है।

विमोचन अवसर पर वरिष्ठ समाजसेवी हार्दिक हुंडिया ने सामाजिक एकता को महाराष्ट्र की आत्मा बताया।

कार्यक्रम में निरंजन डावखरे, निखिल बरचूड़े, संदीप लेले और बाबू नानावटी जैसे कई गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे।

साहित्य, इतिहास और धर्म को जोड़ने वाली यह कृति ठाणे की एक समर्पित सांस्कृतिक धरोहर बनकर उभरी है।

ग्रंथ में श्रीपाल-मयना नगरी, मुनिसुव्रत स्वामी मंदिर और आनंद दीघे जैसे ऐतिहासिक व्यक्तित्वों का उल्लेख किया गया है।

मूलतः राजस्थान के आहोर निवासी हुंडिया परिवार 140 वर्षों से ठाणे में सामाजिक योगदान दे रहा है।

इस अवसर पर ठाणे की विविधता और संस्कृति को एक सूत्र में पिरोने का प्रयास सराहनीय बताया गया।

मदनलाल जी ने बताया कि पूज्य श्री जिनांगयशाश्रीजी म.सा. की प्रेरणा से ग्रंथ लेखन संभव हुआ।

यह ग्रंथ युवा पीढ़ी को ठाणे की गौरवशाली विरासत से जोड़ने का माध्यम साबित होगा।

प्रथम प्रति आचार्य श्री को समर्पित की गई और कार्यक्रम का कुशल संचालन जैनम संघवी ने किया।

इसके अलावा, पुस्तक का डिजिटल संस्करण तैयार करने की योजना भी आयोजकों द्वारा घोषित की गई।

यह प्रयास आनेवाली पीढ़ियों के लिए इतिहास को जीवंत रूप में प्रस्तुत करने की दिशा में एक अभिनव पहल है।

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