जय जय दादा जिनदत्तसूरीश्वर

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6 से 8 मार्च 2026 तक होगा चादर महोत्सव

जैसलमेर के ज्ञान भंडार में संरक्षित है 136 वर्षों से अद्भुत जिनशासन की अमूल्य आध्यात्मिक धरोहर।

यह चादर दादा श्री जिनदत्तसूरिश्वर जी के अग्निसंस्कार में भी नहीं जली थी।

देवशक्ति से यह चादर अजमेर से उड़कर पाटन पहुंच गई थी।

दादा गुरुदेव इस चादर को पहनकर तप और साधना में लीन रहते थे।

उन्होंने इसी चादर से 5 पीर, 52 वीर और 64 जोगनियों को वश में किया था।

बिजली को स्थिर किया, अंधों को दृष्टि दी, और अनेक चमत्कारी कार्य किए गए।

महामारी से जैसलमेर को बचाने हेतु यह चादर 136 वर्ष पूर्व पाटन से लाई गई थी।

राजाज्ञा से लाए गए इस चादर से जल छिड़काव कर महामारी को रोका गया था।

अब वही पवित्र चादर त्रिदिवसीय महोत्सव में दर्शनार्थ लाई जाएगी।

चादर महोत्सव 6, 7 और 8 मार्च 2026 को जैसलमेर में आयोजित किया जाएगा।

यह आयोजन जप, तप, अनुशासन और श्रद्धा का त्रिदिवसीय संगम होगा।

परम पूज्य खरतरगच्छाधिपति आचार्य जिनमणिप्रभ सूरिश्वर जी के सान्निध्य में कार्यक्रम होगा।

आचार्य मनोज्ञसूरिश्वर जी को दिव्य संकेतों के अनुसार प्रेरणा प्राप्त हुई है।

अनेक आचार्य, उपाध्याय, साधु-साध्वी भगवंतों की निश्रा इस आयोजन को पावन बनाएगी।

कार्यक्रम का आयोजन श्री जैन ट्रस्ट, जैसलमेर द्वारा किया जाएगा।

खरतरगच्छ प्रतिनिधि महासभा इस आयोजन में सहआयोजक होगी।

यह आयोजन अध्यात्म, श्रद्धा और शक्ति का अद्वितीय संगम सिद्ध होगा।

समस्त श्रद्धालुओं से आयोजन में सहभागिता की मंगलमय विनती की जाती है।

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