
20 साल बाद जैन युवाओं की कमी में नयी युवा संख्या चैथाई
रह जायेगी, बुजुर्गों की संख्या अधिक हो जायेगी, जैन समाज को अभी
से भविष्य की चिंता करनी चाहिए, वैसे भी जैनियों की संख्या घटती
जा रही रही है अभी से चिंतन और प्रयास करना चाहिए।
चीन, जापान, में जनसंख्या घटने के आसार है इससे बचने के
लिये उन दश्े ाों में अभी से प्रयास। इन खतरों से जारी हो गये हैं वहाँ की
सरकारें इस कार्य में जुट गयी हैं। लिए उन दश्े ाों में अभी से प्रयास
योजनाएँ बना चुकी हैं।
जनै समाज को भी अपनी जनसंख्या बढ़ाने के लिए इय कार्य में जुट जाना होगा।
जनै समाज में नये नये धर्म स्थान बनायें जा रहे है प्राचीन धर्म
स्थानों की चिंता नहीं की जा रही है भविष्य में इन धर्म स्थानों का क्या
होगा, यह सोचना जरूरी है। इस सम्बन्ध में समाज हित चिंतक प.पू
आचार्य श्री विमल सागर सूरीजी हैं, जो कि अपने प्रवचनों द्वारा समाज को जागृत करने के लिए
प्रयत्नशील हैं। उनका यह प्रयास अनुमोदनीय है।
‘‘श्रमण भारती’’ पत्रिका भी इसके लिए प्रयत्नशील हैं।




