गुरु की महिमा, शिष्य का तप और श्रद्धालुओं का सौभाग्य

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गुरुदेव की मौन साधना हमें अंतर्मुखी होने की प्रेरणा देती है। तपस्वी शिष्य की आराधना हमें संयम और आत्मबल का संदेश देती है। वहीं, इस पावन अवसर पर उमड़ती श्रद्धा हमें स्मरण कराती है कि सच्ची गुरु-भक्ति केवल दर्शन तक सीमित नहीं रहती, बल्कि जीवन में धर्म, संयम और सदाचार को अपनाने की प्रेरणा भी देती है।

आइए, इस ऐतिहासिक अवसर पर हम सभी अपने हृदय में श्रद्धा का दीप प्रज्वलित करें, तपस्वी की तपस्या की अनुमोदना करें और गुरुदेव के आगमन को अपने जीवन का एक अविस्मरणीय आध्यात्मिक प्रसंग बनाएँ।

एक नवंबर का सूर्योदय केवल एक नई सुबह नहीं लाएगा, बल्कि हजारों श्रद्धालुओं के हृदय में प्रतीक्षित श्रद्धा, आनंद और गुरु-कृपा की अनुभूति को साकार करेगा।

🙏 गुरुदेव के पावन आगमन की हार्दिक वंदना!
🙏 तपस्वी श्री मंत्रप्रभ सागर जी म.सा. की तपस्या की कोटि-कोटि अनुमोदना!
🙏 जय जिनेन्द्र! जय गुरुदेव!

विकास देवड़ा धोका, खाँण्डप-हैदराबाद

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