Dated: October 2024
जैन समाज सदियों से जन कल्याण और सेवा कार्यों में तन-मन-धन से अग्रणी रहा है।
दवाओं, शिक्षा, चिकित्सा, गौ सेवा, जल सेवा, आपदा राहत या अनगिनत सामाजिक सेवाओं में जैन समाज की उपस्थिति हर क्षेत्र में उल्लेखनीय रही है।
लेकिन राजनीतिक परिदृश्य में यही समाज लगातार उपेक्षित होता रहा है।
विभिन्न राजनीतिक दल चुनावों में जैन समाज का सहयोग लेते हैं, परंतु पद, प्रतिनिधित्व और अधिकार देने में पीछे हट जाते हैं।
अब समय है रणनीति बदलने का
- अब किसी एक राजनीतिक दल का स्थायी समर्थक बने रहना उचित नहीं।
- हमें “फ्लोटिंग वोटर” बनकर, उस दल को समर्थन देना चाहिए जो जैन समाज के प्रतिनिधियों को टिकट दे, उन्हें ससम्मान प्रतिनिधित्व दे।
राजनीति में निष्क्रिय रहकर उपेक्षित रहना हमारी भूल रही है।
अब वक्त है कि हम राजनीतिक सक्रियता और समाजिक एकजुटता दिखाएँ, तभी हम अपना सम्मान और अधिकार प्राप्त कर सकते हैं।
जैन समाज की शक्ति को समझें
- जैन धर्म संस्थानों में लाखों अजैनों को रोजगार मिला है।
- उद्योग और व्यापार के क्षेत्र में जैन समाज सबसे आगे है।
- भारत सरकार को कुल राजस्व (टैक्स) का लगभग 28% योगदान जैन समाज करता है।
- वोटर संख्या भले कम हो, लेकिन जैन समाज के पास दस गुना अधिक प्रभाव डालने की सामाजिक और आर्थिक क्षमता है।
समाधान की राह – सक्रियता और एकता
- एकजुट होकर संगठित मतदान और राजनीतिक सहभागिता बढ़ानी होगी।
- जो राजनीतिक दल जैन समाज को टिकट देगा, उसका स्थानीय स्तर पर सहयोग करें।
- सामूहिक शक्ति और वोट बैंक की रणनीति अपनाकर समाज को उसका हक दिलाएं।
- समाज के शिक्षित, सेवा-भावी, और दूरदर्शी प्रतिनिधियों को आगे लाएं।
निष्कर्ष
अब समय है जैन समाज को केवल दानी और धर्मप्रेमी समाज नहीं, बल्कि राजनीतिक रूप से सजग और संगठित समाज के रूप में स्थापित करने का।
राजनीति में भागीदारी के बिना सम्मान और अधिकार मिलना कठिन है।
आइए, एकजुट होइए, सक्रिय बनिए – तभी मिलेगा समर्पण का सच्चा प्रतिफल।




