मुम्बई आदि स्थानों के जैनों जागो

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Dated: December 2024

तटवर्ती नगरों आदि के समुद्र में डूबने का खतरा

विश्व भर के समुद्र के तटवर्ती इलाकों में बसे हुए शहरों आदि स्थानों को समुद्र स्तर के लगातार बढ़ने से खतरा उत्पन्न हो रहा है। मुम्बई के सन् 2050 तक डूब जाने की सम्भावना है।

वाशिंगटन में वैज्ञानिक खोजों के अनुसार विवरण इस प्रकार है —
सदी के अंत तक एक मीटर बढ़ जाएगा समुद्र का स्तर।
जलवायु परिवर्तन के कारण तटीय क्षेत्रों में रहने वाले लाखों लोगों के लिए जोखिम बढ़ने की संभावना है। ‘नेचर क्लाइमेट चेंज’ नामक पत्रिका में प्रकाशित एक अध्ययन में इसका खुलासा हुआ है।

अध्ययन में कहा गया है कि 2100 तक समुद्र का स्तर एक मीटर बढ़ने से नॉरफॉक, वर्जीनिया से मियामी, फ्लोरिडा तक दक्षिण-पूर्वी अटलांटिक तट पर रहने वाले 14 मिलियन से अधिक लोग प्रभावित होंगे।

अध्ययन के मुताबिक तटीय क्षेत्रों की 70 प्रतिशत आबादी उथले या उभरते भूजल के संपर्क में आ जाएगी, जो दैनिक बाढ़ की तुलना में कहीं अधिक महत्वपूर्ण जोखिम है। भूजल के इस खतरे से संपत्ति के मूल्य में लगभग एक ट्रिलियन डॉलर का नुकसान होने की संभावना है।

उपरोक्त अध्ययन के मुताबिक सभी को सावधान रहकर भविष्य के खतरों से निपटने के लिए प्रयास करना जरूरी है।

मुम्बई, भारत की आर्थिक राजधानी है और जैनों का बड़ा व्यापारिक केन्द्र तथा सबसे अधिक आबादी वाला नगर है। यह नगर पूरे भारत की जैन संस्थाओं को धन उपलब्ध कराने वाली नगरी है।

अतः समय रहते अभी से आवश्यक सुरक्षा के लिए तथा व्यापार अन्य स्थानों पर तलाश रखने की जरूरत है।

आशा है समाज तटवर्ती नगरों के जैनों को हमारी सूचना पर अवश्य ध्यान देना चाहिए।

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