सूरत में छह मुमुक्षुओं को मिला दीक्षा मुहूर्त

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खरतरगच्छाचार्य श्री जिनपीयूषसागर सूरीश्वरजी म.सा. ने पालीताणा हेतु की ऐतिहासिक घोषणा

सूरत। डायमंड, टेक्सटाइल और आध्यात्मिक नगरी सूरत की पावन धरा पर कार्तिक पूर्णिमा के शुभ अवसर पर एक ऐतिहासिक प्रसंग सम्पन्न हुआ। खरतरगच्छाचार्य श्री जिनपीयूषसागर सूरीश्वरजी म.सा. ने छह मुमुक्षुओं को संयम मार्ग पर अग्रसर होने हेतु दीक्षा मुहूर्त प्रदान किया।

इस अवसर पर पहले तीन मुमुक्षु बहनों — सविता बोहरा (कोनरा), डॉ. हर्षा काकरिया (धूलिया) एवं मुस्कान सेठिया (मालेगांव) — को दीक्षा मुहूर्त मिला। विशेष रूप से डॉ. हर्षा काकरिया (M.B.B.S.) ने सांसारिक जीवन का त्याग कर संयम मार्ग चुना। जब उन्होंने दीक्षा मुहूर्त ग्रहण किया, उसी क्षण उनके पिता श्री दिनेश जी काकरिया (चार्टर्ड अकाउंटेंट), माता श्रीमती अनामिका जी काकरिया और भाई विधान काकरिया ने भी संयम की भावना व्यक्त की।
आचार्य श्री ने उन्हें भी दीक्षा मुहूर्त प्रदान किया। इस प्रकार सूरत में एक ही परिवार के चार सदस्यों सहित कुल छह मुमुक्षुओं को दीक्षा का पावन अवसर प्राप्त हुआ।

आचार्य श्री ने घोषणा की — सभी छह मुमुक्षुओं की दीक्षा माघ वदी तेरस, शुक्रवार, 16 जनवरी 2026 को श्री शत्रुंजय महातीर्थ, पालीताणा में सम्पन्न होगी।” सभी मुमुक्षु अष्टापद तीर्थ, आलोट से निकलने वाले 41 दिवसीय ‘छह रि पलीत संघ’ के साथ पालीताणा पहुँचेंगे।इस अवसर पर साधु-साध्वी मंडलों की उपस्थिति में प्रवचन, वंदना एवं भक्ति का मनोहारी माहौल रहा। जब छह दीक्षाओं की घोषणा हुई, तो सभागार में श्रद्धा और आनंद का सागर उमड़ पड़ा।
सूरत–बाड़मेर जैन श्री संघ के श्री चम्पालाल बोथरा (जैन) ने कहा —
“चिकित्सा और वित्त क्षेत्र से जुड़े युवाओं का संयम मार्ग चुनना पूरे समाज के लिए प्रेरणास्रोत है। यह प्रसंग सूरत के इतिहास में स्वर्णाक्षरों में अंकित रहेगा।”

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