स्वर विज्ञान- यात्रा की सफलता के लिए

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यात्रा या प्रवास के लिए निकलते समय या किसी कार्य हेतु कहीं जाना हो तो आपका जिस तरफ का स्वर चल रहा हो उसी तरफ के पैर को प्रारम्भ में रखकर प्रथम कदम को आगे रख कर चलते इससे यात्रा प्रवास में सफलता मिलती है। जैसे यात्रा प्रारम्भ करने से पहले यदि आपका बायाँ, स्वर चल रहा है तो यात्रा में बायाँ पैर पहले आगे बढ़ा कर प्रस्थान करना चाहिए।

यदि किसी लाभ या कार्य सिद्धि के लिए या अधिकारी से मिलने जाना हो तो घर से निकलते समय चल रहे स्वर की तरफ का पैर प्रथम उठाकर चलें तो श्रेष्ठ रहेगा। फिर जहाँ पहुँच कर जिससे बात करनी हो या काम लेना हो उसे आपके बन्द स्वर की ओर प्रथम पाँव रखना चाहिए, जिस तरफ का आपका स्वर चल रहा है। जैसे दक्षिण स्वर चलने की दशा में अपने को उस अधिकारी के दाहिने हाथ की तरफ रखना चाहिए। दूसरे शब्दों में उस अधिकारी को अपने खाली या बन्द स्वर की तरफ अर्थात बायीं तरफ रखना चाहिए। यही बात साक्षात्कार (इण्टरव्यू) में भी काम में लायें।

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