शरद ऋतु स्वास्थ्य मार्गदर्शन: आयुर्वेद के अनुसार आहार, विहार और पित्त दोष संतुलन के उपाय (सितम्बर मध्य – नवम्बर मध्य)

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विषयविवरण(सितम्बर मध्य – नवम्बर मध्य)प्रधान दोष – पित्त (अधिक बढ़ता है)अग्नि (पाचन शक्ति) – मध्यम“स्वास्थ्य हमारा मूल स्वरूप है, हमें केवल उसे बनाए रखना है।“ऋतुचर्या की दृष्टि से विशेष पर्वनवरात्रि (शरद ऋतु की शुरुआत), शरद पूर्णिमा, दीपावली, अन्नकूट / गोवर्धन पूजा, गोअष्टमीतापमानगर्मीआहारक्या खाएँ (पित्त शांत करने वाले आहार):अनुशंसित (शीतल, हल्का, मधुर, तिक्त व कषाय):• अन्न – चावल, गेहूँ, जौ, ज्वार की रोटी• दुग्ध, घी (अल्प मात्रा)• मूंग दाल• सब्ज़ियाँ – ककड़ी, लौकी, कद्दू, सफेद कद्दू, कच्चा पपीता, कच्चा केला, नींबू (कम मात्रा में), मेथी• फल – अंगूर, अनार, सेब, खजूर, आंवला, संतरा, पका केला• मसाले – धनिया, सौंफ, इलायची, हल्दी...

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