“बाड़मेर में सूरि मंत्र साधना की पूर्णाहुति पर महामांगलिक संपन्न — पूज्य आचार्य श्री जिनमणिप्रभसूरीश्वरजी म.सा. की निश्रा में अध्यात्म व भक्ति का भव्य उत्सव”

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सूरि मंत्र साधना की पूर्णाहुति: महामांगलिक संपन्न

बाडमेर नगर में चातुर्मासार्थ बिराजमान पूज्य गुरुदेव प्रज्ञापुरुष आचार्य भगवंत श्री जिनकान्तिसागरसूरीश्वरजी म.सा. के शिष्य रत्न पूज्य गुरुदेव युग दिवाकर अवंति तीर्थोद्धारक खरतरगच्छाधिपति आचार्य भगवंत श्री जिनमणिप्रभसूरीश्वरजी म.सा. की सूरि मंत्र की तीसरी उपविद्या पीठिका की 25 दिवसीय साधना अत्यन्त आनंद के साथ संपन्न हुई। इस पीठ की अध्ािष्ठायिका देवी महालक्ष्मी है।

कुशल वाटिका के विशाल हॉल को पीठिका की साधना के लिये भव्यतम सजाया गया था। चारों ओर की दीवारों को कपडे पर हाथ से बने विशाल चित्रों से सुशोभित किया गया था। इन दीवारों पर शत्रुंजय, गिरनार, पावापुरी, जहाज मंदिर, गज मंदिर के विशाल चित्र अंकित किये गये थे। साथ ही गुणायाजी तीर्थ की विराट् रंगोली बनाई थी। साध्ाना कक्ष के प्रवेश स्थल पर प्रभु के पांच कल्याणकों की अंध्ोरे में नजर आने वाली रंगोलियाँ बनाई गई थी। साधना कक्ष के मध्य स्थल पर परमात्मा महावीर की विशाल रंगोली देखते ही बनती थी।

मुख्य वेदिका पर पंचध्ाातु की तीन विशाल पूजनीय प्रतिमाओं को प्रतिष्ठित किया गया था। चारों ओर स्फटिक आदि रत्नों की बहुमूल्य प्रतिमाओं से पूरे हॉल को सजाया गया था। पांच पीठिकाओं के अध्ािष्ठायक- सरस्वती देवी, त्रिभुवन स्वामिनी, महालक्ष्मी, गणिपिटक यक्षराज तथा गौतम स्वामी की विशाल प्रतिमाओं को बहुत ही आकर्षक रूप से सजाया गया था। हॉल में सजी एक हजार रजतमयी महालक्ष्मी की प्रतिमाऐं अलग ही उर्जाभरे वातावरण का निर्माण कर रही थी।

साथ ही एक पाट पर सूरि मंत्र का विशाल पट्ट सजाया गया था, जिसमें दश दिक्पाल, नवग्रह, सोलह विद्यादेवी तथा चौसठ इन्द्रों के चित्र बने थे।

पूज्य गुरुदेव आचार्य भगवंत श्री जिनकान्तिसागरसूरीश्वरजी म.सा. तथा पूजनीया माताजी म. श्री रतनमालाश्रीजी म. की प्रतिमा आशीर्वाद मुद्रा में बिराजमान की गई थी।

इस सारी सजावट का मार्गदर्शन व निर्देशन पूज्य मुनिराज श्री मयूखप्रभसागरजी म.सा. ने 15 दिनों की रात दिन की मेहनत करके अत्यन्त जागरूकता के साथ किया था।

ता. 18 सितम्बर को प्रातः कुंभस्थापना आदि विधि विधिनों के साथ पीठिका का प्रारंभ हुआ था। पूज्यश्री ने संपूर्ण मौन व एकान्त साध्ाना के साथ 25 दिनों तक निरन्तर आयंबिल किये। पूज्य गणिवर्य श्री मयंकप्रभसागरजी म. व पूज्य मुनि श्री मयूखप्रभसागरजी म. ने आहार आदि की सारी व्यवस्थाओं का दायित्व सम्हाला।

पूज्य मुनि श्री श्रेयांसप्रभसागरजी म., पू. मुखरप्रभसागरजी म. पू. मध्ाुरप्रभसागरजी म. ने शहर में प्रवचन आदि का दायित्व निर्वहन किया। नवपदजी की ओली के दिनों में पूजनीया बहिन म. ने प्रवचन फरमाये।

ता. 12 अक्टूबर को प्रातः महालक्ष्मी की विशिष्ट साध्ाना के पश्चात् लगभग 9 बजे पूज्यश्री पीठिका कक्ष से बाहर पधारे। मुनिसुव्रत स्वामी मंदिर के दर्शन कर शहर पधारे। वरघोडे का भव्य आयोजन हुआ। प्रवचन स्थल श्री सुध्ार्मा प्रवचन वाटिका पर पूज्यश्री के पधारने पर मंगल कार्यक्रम का प्रारंभ हुआ। पू. गणिवर्य श्री मयंकप्रभसागरजी म. आदि मुनि मंडल के साथ पूजनीया बहिन म. डॉ. श्री विद्युत्प्रभाश्रीजी म. पू. साध्वी श्री प्रज्ञांजनाश्रीजी म. आदि साध्वी मंडल की पावन निश्रा रही। इस अवसर पर संघ की विनंती स्वीकार कर आंचलगच्छ के साध्वी श्री भावगुणाश्रीजी म. आदि ठाणा पधारे।

इस अवसर पर पूज्यश्री ने मांगलिक से पूर्व दिये अपने प्रवचन में साधना की विशिष्टता का वर्णन किया। उन्होंने वाचिक, उपांशु व मानस इन तीनों प्रकार के जाप का वर्णन करते हुए उनकी विशेषता बताई। उन्होंने प्रारंभ में गत वर्ष सूरत में हुई पीठिका का स्मरण करते हुए कहा- उस समय पूजनीया माताजी म. का वात्सल्य भरा सानिध्य प्राप्त था। इस वर्ष सब हैं, पर माताजी म. नहीं है। उनकी कमी प्रतिपल खलती है। आज उन्हें विदा हुए 305 दिन हो गये हैं। एक भी पल उनकी पावन स्मृति के बिना नहीं जाता।

इस अवसर पर पूज्य मुनि श्री मुखरप्रभसागरजी म. ने पूज्यश्री की साध्ाना की महिमा का वर्णन किया। पूज्य मुनि श्री मध्ाुरप्रभसागरजी म. के बाडमेरी भाषा में दिये गये अपने वक्तव्य से सभी को आश्चर्यचकित किया।

पूज्य बहिन म. डॉ. विद्युत्प्रभाश्रीजी म. ने पूज्यश्री के स्वभाव और जीवन-दर्पण की विशेषताओं को निरूपित किया। इस अवसर पर पू. साध्वी डॉ. श्री विज्ञांजनाश्रीजी म. पू. साध्वी श्री आज्ञांजनाश्रीजी म. पू. साध्वी श्री नमनरूचिश्रीजी म. पू. साध्वी श्री अपूर्वरूचिश्रीजी म. पू. साध्वी श्री आप्तरूचिश्रीजी म., केएमपी अध्यक्ष श्रीमती सरिता जैन, सुश्री सिमरन बोथरा, सुश्री सरोज गांध्ी, श्री ललित कवाड तिरूपातूर, श्री मनीष बाफना नंदुरबार, श्रीमती कांता सेठिया, श्री विवेक भंसाली जोध्ापुर, श्रीमती मीना बैद इन्दौर, मुमुक्षु वेदांत श्रीश्रीश्रीमाल मुंबई आदि ने अपने वक्तव्य दिये।

चातुर्मास कमिटि बाडमेर के अध्यक्ष श्री अशोककुमारजी ध्ाारीवाल ने मारवाडी भाषा में दिये अपने वक्तव्य में इस चातुर्मास में मिले अपने आनंद को प्रकट किया।

इस अवसर पर संघवी श्री तेजराजजी गुलेच्छा ने दादा जिनदत्तसूरि चादर महोत्सव के बारे में वक्तव्य दिया। उन्होंने कहा- चादर के रूप में गुरुदेव हमारे सामने हाजरा हजूर हैं। इस महोत्सव में सबको भाग लेना है।

इस अवसर पर संघवी कुशलजी गुलेच्छा, सुरेशजी लूणिया ने भी अपने भाव प्रकट किये। चादर महोत्सव समिति की ओर से पूज्यश्री को ब्रोशर अर्पण किया गया।

केयुप के चेयरमेन संघवी अरूण ललवानी ने चौविहार छठ यात्रा के बारे में जानकारी दी। उसके बेनर का विमोचन किया गया। गुरुपूजन का लाभ जयपुर निवासी श्री प्रकाशचंदजी विजयकुमारजी लोढा परिवार ने तथा रजतमय चावलों से वध्ाामणे का लाभ इचलकरंजी निवासी संघवी श्री माणकचंदजी अरूणकुमारजी विवेककुमारजी ललवानी परिवार ने लिया।

इस अवसर पर जैन श्वे. खरतरगच्छ श्री संघ मुंबई के अध्यक्ष श्री गुलाबचंदजी जीरावला, मंत्री श्री प्रदीप श्रीश्रीश्रीमाल ने मुंबई चातुर्मास हेतु विनंती की।

इसके साथ ही बाडमेर खरतरगच्छ संघ, श्री जिनकुशलसूरि खरतरगच्छ संघ पाली तथा श्री संघ नंदुरबार ने आगामी चातुर्मास हेतु अपनी विनंती प्रस्तुत की, जिसे स्वीकार कर पूज्यश्री ने चातुर्मास कराने का भाव प्रकट किया।

पूज्यश्री ने अपने प्रवचन के बाद मंत्रों महामंत्रों से गुम्फित महामांगलिक सुनाई। लगभग 20 मिनट चली इस मंगलिक को श्रवण कर उपस्थित विराट् जनसमूह ने परम ध्ान्यता का अनुभव किया।

पूज्यश्री की साधना में उत्तर साधक का दायित्व परम सेवाभावी श्री मुकेशजी प्रजापत ने सम्हाला।

महामांगलिक को श्रवण करने के लिये अहमदाबाद, सूरत, बैंगलोर, चेन्नई, नंदुरबार, अक्कलकुआं, इन्दौर, उज्जैन, जयपुर, जोध्ापुर, मोकलसर, सिवाना, दिल्ली, रायपुर, दुर्ग, बालोतरा, पाली, ब्यावर, उदयपुर आदि पूरे भारत से संघों व श्रद्धालुओं का आगमन हुआ। चौहटन, रामसर, ध्ाोरीमन्ना, सांचोर, चितलवाना, कारोला, बाछडाउ, झिंझनीयाली, जैसलमेर, हरसाणी आदि क्षेत्रों से बडी संख्या में श्रद्धालु पधारे।

बिलाडा में दादावाडी का आमूलचूल जीर्णोद्धार होगा

चतुर्थ दादा गुरुदेव अकबर प्रतिबोध्ाक श्री जिनचन्द्रसूरीश्वरजी म.सा. की पुण्य स्थली बिलाडा नगर में दादावाडी का आमूलचूल जीर्णोद्धार पूज्य गुरुदेव गच्छाध्ािपति आचार्य श्री जिनमणिप्रभसूरीश्वरजी म.सा. की पावन निश्रा व उनके मार्गदर्शन में संपन्न होगा।

महामांगलिक के पवित्र अवसर पर दादावाडी ट्रस्ट के महामंत्री श्री विवेक भंसाली ने संपूर्ण ट्रस्ट की ओर से पूज्य गुरुदेवश्री से आमूलचूल जीर्णोद्धार के लिये अपनी निश्रा व मार्गदर्शन हेतु विनंती की जिसे स्वीकार कर पूज्यश्री ने अपनी स्वीकृति प्रदान की। उन्होंने कहा- यह दादा गुरुदेव का चौथा ध्ााम हैं। तदनुसार ही इसका सुन्दरतम निर्माण होना है। इस उद्घोषणा से सकल श्री संघ में परम हर्ष व आनंद का वातावरण व्याप्त हो गया। जय जय की दिव्य ध्वनि से इसे बध्ााया।

महत्तरा श्री दिव्यप्रभाश्रीजी म. के स्मृति विशेषांक का विमोचन

पूजनीया महत्तरा पद विभूषिता खान्देश शिरोमणि श्री दिव्यप्रभाश्रीजी म.सा. की पावन स्मृति में जहाज मंदिर मासिक पत्रिका द्वारा विशेषांक का प्रकाशन किया गया है। इसका विमोचन पूज्य गुरुदेव गच्छाध्ािपति आचार्य श्री जिनमणिप्रभसूरीश्वरजी म.सा. की पावन निश्रा में किया गया। इस अवसर पर पूज्य आचार्यश्री ने कहा- महत्तराजी हमारे समुदाय व गच्छ के सबसे वरिष्ठ साध्वीजी म. थे। गत वर्ष फाल्गुन सुदि 12 को उनका समाध्ाि के साथ पालीताना में स्वर्गवास हो गया था।

उनकी पावन स्मृति में इस विशेषांक का प्रकाशन पूजनीया साध्वी श्री विश्वज्योतिश्रीजी म. की प्रेरणा से हुआ। इस विशेषांक का जीवटभरा संपादन पूज्य मुनिराज श्री मयूखप्रभसागरजी म. ने किया। उन्होंने अपनी प्रस्तावना में लिखा है कि महत्तराजी के जीवन ने, उनके व्यवहार और ज्ञान ने मुझे बहुत प्रभावित किया है।  सरलता, विद्वत्ता, अनुशासन, समर्पण आदि उनके गुण स्मरण में आते हैं। उनके इन गुणों का साक्षात्कार मैंने स्वयं ने पालीताना में किया था।

नवतत्व प्रश्नोत्तरी तथा संवेदन वाटिका का विमोचन

पूजनीया बहिन म. डॉ. श्री विद्युत्प्रभाश्रीजी म.सा. की शिष्या पूजनीया साध्वी डॉ. श्री नीलांजनाश्रीजी म. द्वारा लिखित नवतत्व प्रश्नोत्तरी के तीसरा संस्करण का विमोचन किया गया। विमोचन का लाभ जयपुर निवासी श्री राजेन्द्रजी संचेती परिवार ने लिया।

साथ ही ध्ाोरीमन्ना संघ की ओर से प्रकाशित संवेदन वाटिका का विमोचन भी किया गया। इसका संकलन पूजनीया बहिन म. डॉ. श्री विद्युत्प्रभाश्रीजी म.सा. की शिष्या पू. साध्वी श्री नीतिप्रज्ञाश्रीजी म. ने किया है।

मुहूर्त्त प्रदान

  • श्री जिनकुशलसूरि सेवाश्रम संस्थान कुशल वाटिका बाडमेर द्वारा कुशल वाटिका में नवनिर्मित दो देवकुलिकाओं की प्रतिष्ठा का शुभ मुहूर्त्त ता. 3 नवम्बर 2025 का प्रदान किया गया। इनमें पू. साध्वी श्री प्रकाशश्रीजी म. व पू. माताजी म. श्री रतनमालाश्रीजी म. की प्रतिमा प्रतिष्ठित होगी।
  • बीकानेर निवासी बांठिया परिवार द्वारा निर्मित श्री पार्श्वनाथ मंदिर के जीर्णोद्धार उपरान्त अंजनशलाका प्रतिष्ठा का शुभ मुहूर्त्त ता. 8 फरवरी 2026 का प्रदान किया गया।
  • मोकलसर श्री संघ की विनंती स्वीकार कर वहाँ उत्थापन व पुनः प्रतिष्ठा का शुभ मुहूर्त्त मिगसर वदि 12 रविवार ता. 16 नवम्बर 2025 का शुभ मुहूर्त्त प्रदान किया गया।
  • पादरू अहमदाबाद निवासी श्रीमती बक्सुबाई मानमलजी गोलेच्छा परिवार द्वारा श्री शंखेश्वर तीर्थ दादावाडी परिसर में नवनिर्मित श्री काला भैरव मंदिर की प्रतिष्ठा का ता. 5 दिसम्बर 2025 का शुभ मुहूर्त्त प्रदान किया गया।
  • संघवी श्री बाबुलालजी कमलादेवी मंडोवरा परिवार द्वारा श्री शंखेश्वर तीर्थ दादावाडी परिसर में नवनिर्मित श्री आदिनाथ जिन मंदिर की अंजनशलाका प्रतिष्ठा का ता. 10 दिसम्बर 2025 का शुभ मुहूर्त्त प्रदान किया गया।
  • श्री जैन श्वेताम्बर खरतरगच्छ संघ सेतरावा को श्री आदिनाथ जिन मंदिर के जीर्णोद्धार की संपन्नता के बाद प्रतिष्ठा का ता. 20 फरवरी 2026 का शुभ मुहूर्त्त प्रदान किया गया।

पूज्य गच्छाधिपतिश्री का कार्यक्रम

ता. 03.11.25 कुशल वाटिका में दो देवकुलिकाओं में प्रतिष्ठा

ता. 11.11.25 जहाज मंदिर में पूज्य आचार्यश्री की 40वीं पुण्यतिथि

ता. 16.11.25 मोकलसर में प्रतिष्ठा

ता. 05.12.25 शंखेश्वर दादावाडी परिसर में काला भैरव मंदिर प्रतिष्ठा

ता. 10.12.25 शंखेश्वर दादावाडी परिसर में अंजनशलाका प्रतिष्ठा

ता. 24.12.25 मोकलसर में दो दिवसीय महोत्सव

ता. 26 से 29.12.25 सिवाना से नाकोडाजी छह री पालित संघ

ता. 1.1.2026 जसोल में भवन उद्घाटन

ता. 17 से 21.1.2026 सिवाना चंपावाडी में रजत महोत्सव

ता. 8.2.26 बीकानेर में अंजनशलाका प्रतिष्ठा

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