Dated: November 2024
संतों-साध्वियों की सुरक्षा सर्वोपरि — सावधानी अनिवार्य
चौमासा पूर्ण होते ही देशभर में अनेक स्थानों से संतों व साध्वियों का पद बिहार प्रारंभ होता है। यह परंपरा हमारे जैन धर्म की आध्यात्मिक चेतना और तपोबल का प्रतीक है। संतों का एक स्थान से दूसरे स्थान तक पदयात्रा करना केवल धार्मिक कर्म नहीं, बल्कि समाज में अहिंसा, संयम और आत्मशुद्धि का संदेश फैलाने का माध्यम है।
किन्तु वर्तमान समय में परिस्थितियाँ पूर्ववत नहीं रहीं। बढ़ती यातायात, सामाजिक अस्थिरता और असुरक्षा की घटनाओं को देखते हुए संत-साध्वियों की सुरक्षा एवं सावधानी अत्यंत आवश्यक बन गई है। समाज के हर स्तर पर सजगता और सहयोग की भावना जाग्रत होनी चाहिए।




