85 लाभार्थियों को मिला नया जीवन — 107 कृत्रिम पैरों की सफल फिटिंग
नई दिल्ली।
28 से 31 अक्टूबर 2025 तक जैन मंदिर, छोटी दादाबाड़ी (साउथ एक्सटेंशन पार्ट-2) में पुष्पा–जितेंद्र राखयान परिवार एवं मानव सेवा सन्निधि द्वारा निःशुल्क कृत्रिम पैर (जयपुर फुट) एवं पोलीयो प्रभावित व्यक्तियों हेतु कैलिपर्स शिविर का सफल आयोजन किया गया।
इस चार दिवसीय सेवा शिविर में 150 से अधिक पंजीकरण प्राप्त हुए, जिनमें से 85 लाभार्थियों ने लाभ लिया तथा 107 कृत्रिम पैरों की फिटिंग की गई।
विशेष बात यह रही कि सेवा देने वाले कई स्वयंसेवक स्वयं कभी लाभार्थी रह चुके थे और अब दूसरों की सहायता को अपना सौभाग्य मानते हैं।
आयोजन के प्रेरक
यह शिविर छोटी दादाबाड़ी ट्रस्ट के अध्यक्ष श्री जितेंद्र जी राखयान, उनकी धर्मपत्नी श्रीमती पुष्पा जी, तथा पुत्र वरुण जी राखयान की दूरदृष्टि और सतत सहयोग से संभव हुआ।
वरुण राखयान ने कहा —
“लोगों को कृत्रिम पैर लगने के बाद आत्मविश्वास के साथ स्वतंत्र रूप से चलते देखना, और मुस्कान के साथ घर लौटते हुए देखना—यह अनुभव सचमुच अभिभूत कर देने वाला है और सेवा का वास्तविक संतोष प्रदान करता है।”
सेवा टीम का सराहनीय योगदान
- मृणाल गांधी — पंजीकरण एवं सेटअप (6 वर्ष की आयु में लाभार्थि, वर्तमान में 8 वर्ष की सेवा)।
- गुरविंदर जी — वर्कशॉप प्रबंधन।
- सुमन जी, रमेश भाई — वॉकिंग सपोर्ट, व्यवस्था एवं काउन्सलिंग।
- अशोक जी — रिसेप्शन और पंजीकरण।
प्रमुख आगंतुक
अहमदाबाद से श्री तेजस जी मेहता, प्रसिद्ध ग़ज़ल गायिका श्रीमती अनिता जी सिंघवी, तथा Society for Welfare of Mentally Handicapped के उपाध्यक्ष श्री वीरेंद्र सिंह जी मेहता आदि गणमान्य ने पहुंचकर व्यवस्थाओं की प्रशंसा की।
निःशुल्क सुविधाएँ
लाभार्थियों और उनके परिजनों के लिए भोजन, रहने, देखभाल और प्रशिक्षण की व्यवस्था पूरी तरह निःशुल्क रही।
लाभार्थियों को तभी शिविर से जाने की अनुमति दी गई, जब कृत्रिम पैर की फिटिंग पूरी तरह सहज हो गई और उपयोग का प्रशिक्षण पूरा हो गया।
मानव सेवा सन्निधि
संस्था का संचालन संस्थापिका एवं कार्यकारी निदेशक श्रीमती अभिलाषा जी सिंघवी (प्रसिद्ध राजनयिक डॉ. एल.एम. सिंघवी की सुपुत्री) द्वारा किया जाता है, जो 38 वर्षों से दिव्यांगजन सेवा के क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभा रही हैं।
अभिलाषा जी ने बताया उनके शिविरो की पहेली उपलब्धि खाना, पीना, सोना, रहना सब हमारे शिविर में ही होता है जो मुफ्त और निशुल्क होता है सबके लिए, और जब तक वो चल के नहीं जाता है तब तक उसको यहीं पर रखा जाता है। दूसरी उपलब्धि यह है की इसमें हमारे जो वॉलंटियर्स हैं, जो सहायता टीम है, सभी पिछले शिविर के लाभार्थी है, हमारे मानव सेवा सन्निधि ऑर्गेनाइजेशन में एक भी व्यक्ति सैलरी पर नहीं है, ये इस मॉडल पे चल रही एक मात्र संस्था है।
यह शिविर समाज में मानवता, करुणा और निःस्वार्थ सेवा की प्रेरणादायी मिसाल बनकर स्मरणीय रहा।









